कविता:आज देखो फिर होली आई है।


होली पर कविता: आज देखो फिर होली आई है।
🖊️नवीन सिंह राणा

आज देखो फिर होली आई है,
रंगो की डोली साथ में लाई है,
नई कोपले मुस्करा रहीं हैं,
फसलें होली में लहरा रहीं हैं।

प्रकृति की छटा बड़ी निराली है,
पुष्प कलियां भोली भाली हैं
फागुन की थाप रंगोली में सराबोर है,
देख कर छठा मन अति विभोर है।

धरा हर्षित हो गान गा रही है,
प्रफुल्लित मन से पग थिरका रही है,
ढोल की थाप बजती सुबह शाम है,
गीतों में राधे कृष्ण, कभी सीता राम है।

गोकुल सजती, बृज की होरी शान है,
अयोध्या की होरी, सबका अभिमान है,
गांव गांव होरी राग अलाप रहा है,
मृदंग की ताल में संगीत जाप रहा है।

मंजीरे की बोली मन भा रही है,
गोरी की मुस्कान गीत गुनगुना रही है,
गुलाल उड़ रहा कहीं अबीर उड़ रहा,
देख कर सौंदर्य, युवकों का मन मचल रहा।

शांति और सौहार्द का मुबारक हो त्यौहार,
बरसता रहे प्रेम, उमड़ता रहे प्यार,
नफरत, घृणा, लालच अग्नि में दहन करो,
जन जन के मन में “नवीन” स्नेह उदगार करो।

नवीन सिंह राणा द्वारा रचित






Published by Naveen Singh Rana

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Holi Milan smaroh 2024 होली मिलन समारोह 2024

होरी में छिपी है हमारी परम्परा

माघी महोत्सव 2026 —थारू अस्मिता , जागरूकता और सामुदायिक सशक्तिकरण का महापर्व गांव बर्दिया बहराइच