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कहानी: सिंहासन नहीं विश्वास का ताज

कहानी: सिंहासन नहीं विश्वास का ताज  🖊️ नवीन सिंह राणा  एक बार की बात है, हिमालय की तलहटी में बसा एक समृद्ध राज्य था—सुंदर, शांत, पर भीतर से उलझनों में घिरा हुआ। वर्षों तक उस राज्य पर एक वृद्ध और न्यायप्रिय राजा का शासन रहा। पर अब समय ने करवट ली थी। राजा वृद्ध हो चुके थे और उन्होंने घोषणा कर दी— “अब समय आ गया है कि राज्य को नया नेतृत्व मिले। ऐसा राजा चुना जाए जो केवल सिंहासन का अधिकारी न हो, बल्कि लोगों के विश्वास का भी अधिकारी हो।” राज्य में हलचल मच गई। लोग चौपालों पर इकट्ठा होने लगे।  किसान खेतों में काम करते-करते इसी विषय पर चर्चा करने लगे। व्यापारी अपनी दुकानों पर ग्राहकों से भी यही पूछते— “कौन होगा नया राजा?” “क्या वह हमारी अपेक्षाओं पर खरा उतरेगा?” राज्य के लोग अब केवल किसी राजवंश के उत्तराधिकारी को नहीं चाहते थे। वे ऐसा राजा चाहते थे जो— अपने कार्यों को बेहतरीन ढंग से कर सके, जिसके पास स्वयं की सक्षम और समर्पित टीम हो, जो स्वयं में आत्मनिर्भर और निर्णयक्षम हो, और जिसके साथ चलने वाले चार-सात युवा साथी हों—जो राज्य के भविष्य का प्रतीक हों। परीक्षा की घोषणा वृद्ध राजा...