खटीमा सितारगंज क्षेत्र में श्रद्धा जागरण कार्य का प्रभाव

खटीमा सितारगंज क्षेत्र में श्रद्धा जागरण कार्य का प्रभाव
नवीन सिंह राणा की लेखनी से 
किसी भी समाज, क्षेत्र, समुदाय, जाति या धर्म के अस्तित्व को बचाये रखने में उस क्षेत्र विशेष में प्रचलित मान्यताओं और परम्पराओं का विशेष महत्व होता है। जब-जब इन प्रचलित मान्यताओं व परम्पराओं पर किसी बाहरी विचारधारा या मान्यताओं का प्रभाव पड़ता है, तब-तब शनै-शनै संस्कृति का क्षय होना आरम्भ हो जाता है। और वे परम्परायें व मान्यताये जो पिछली कई पीढियों से उस क्षेत्र विशेष, समाज विशेष, जाति विशेष या धर्म विशेष को एक आदर्श सूत्र में संजोय व संवारे हुई थी विघटित होने लगती हैं।

 श्रद्धा जागरण हिन्दू धर्म जागरण का आस्थायुक्त ऐसा विशेष कार्य है, जो समाज विशेष अथवा क्षेत्र विशेष के लोगो में उनकी प्राचीन मान्यताओं व परम्पराओं को जीवित रखते हुए संस्कृति संरक्षण जैसे आदर्श कार्यो में अग्रसर है व अपने प्राचीन देवी-देवताओ पर आस्था बनाये रखते हुए संस्कार पूर्ण सेवा भाव बनाये रखने हेतु प्रयासरत है।

खटीमा - सितारगंज क्षेत्र, जो सदियों से वनवासी थारु जनजाति बाहुल्य क्षेत्र है जो अपनी प्राचीन मान्यताओं व परम्पराओं को संरक्षित करते हुए अमूल्य थारु संस्कृति को बचाये हुए था, जिस पर समय-समय पर बाहरी प्रभावों से ग्रस्त वैचारिक, धार्मिक व सांस्कृतिक मान्यताओं का प्रहार होता रहा है। लेकिन इस क्षेत्र विशेष में निवास करने वाली थारू जनजाति स्वंय की समृद्ध संस्कृति को बाहरी आघातो से व उनके प्रभावो से बचाये रखने का प्रयास करती रही है, साथ ही हिन्दू सनातन धर्म की मान्यताओं का हृदय से आदर करते हुए प्राचीन वैदिक देवी-देवताओ की आस्थायुक्त पूजा-आराधना करती रही है। लेकिन पिछले कुछ दसकों से थारु संस्कृति पर बाहरी धार्मिक, सांस्कृतिक व सामाजिक शक्तियों का आक्रामक प्रहार हु आ, जिससे फैलने वाले मीठे जहर के समान प्रभावो से थारू संस्कृति की अमूल्य व आदर्श परम्पराये व मान्यतायें कमजोर होने लगी। यहाँ भोले-भाले व सादगी पूर्ण जीवन जीने वाले थारू लोग उन बाहरी संप्रदायो व धर्म मान्यताओं को समझ नहीं पाये व उसे स्वीकार करअपनी अमूल्य व आदर्श विरासत को व्याग करने लगे, जो भयावह था। जिसने थारु बनवासी जाति की धार्मिक, सांस्कृतिक व सामाजिक स्वरुप को विकृत कर दिया जिससे समाज की एकता व अखंडता कमजोर होने लगी। अपने समाज का यह पत्नो मुख स्वरूप किसी भी समाज प्रेमी के लिए असहनीय है जो सामाज को सकारात्मक नजरिये से देखता हो। इस भयावह परिस्थिति से डटकर मुकाबला कसे हेतु श्रीमान डिल्लू जी ने दायित्व ग्रहण कर श्रद्धा-जागरण रुपी अस्त्र शस्त्र लेकर कदम बढ़ाया।

घर-घर, गाँव-गाँव जाकर श्रद्धा- जागरण टीम, श्रद्धा व पूजा-आराधना के माध्यम से थारू समाज के बीच जाकर भजन-संगीत के सहारे लोगों को धर्म परिवर्तन व वैदिक पद्धति से सनातनी देवी देवताओं की पूजा  अर्चना से अवगत कराया। यह भक्तिमय समाज हित कार्य कुछ ही समय में हृदय की गहराइयो में उतरते हुए सभी को प्रभावित करने लगा। समाज के धर्मांतरित व अन्य सम्प्रदायों में चले गये लोग पुनः स्वधर्म व परम्पराओं को ग्रहण करने लगे। जिससे बहुत कम समयान्तराल में गौव-गाँव में इसका भक्तिमय प्रभाव दिखने लगा है। इस कार्य को जन-जन तक प्रसारित करने हेतु गाँव-2 में ग्राम समितियों का गठन किया गया जिसमे मातृ शक्ति का सहयोग सराहनीय रहा है।

खरीमा -सिगरंगंज क्षेत्र ग्राम विसौटा नौगवांनाथ में श्रद्धा जागरण ग्राम समिति के द्वारा सर्व प्रथम भव्य शिव-शक्ति परिवार धाम की स्थापना की कई, जो आज सम्पूर्ण ग्राम वासियो की आस्था व श्रद्धा का केंद्र बना आ है। जहाँ प्रत्येक दिवस प्रात व संध्या पूजन सामूहिक रूप से ग्राम वासियों द्वारा किया जाता है व मातृ शक्ति श्रद्धा जागरण समिति इस देव धाम की सेवा-दायित्व को नि भा रहा है। इसी तरह ग्राम नौगवाठग्गू, मद्दवट, अमाऊं, फुलैया, भुड़िया, मुडेली , गौहर पटिया,नौजा,  चांदा, वन भुडिया, सड़ा-सडिया, बग्गा चौवनआदि अनेक ग्रामो में श्रद्वा जागरण समिति द्वारा देवालयों के निर्माण या तो पूर्ण  चुके हैं अथवा कार्य निर्माण चल रहा है। साथ ही साथ समय-समय पर कुछ विशेष कार्य संपादित होते रहे हैं।

 जागरण की सम्पूर्ण टीम के द्वार इन कार्य को आगे बढनेने में विभिन्न ग्राम समितियों के प्रमुख सदस्य , कमलदीप सिंह, हरनन्द सिंह, हरीश सिह, महेन्द्र सिहा सरदार सिंह, सरवन सिंह, दीपक सिंह, दुर्योधन सिह, राम-किशोर सिंह, मात्र शक्ति में अनीता देवी, कृष्णा देवी, बन्धन कली आदि प्रमुख हैं।

श्रद्धा जागरण की सम्पूर्ण टीम के अथक प्रयास व सहयोग से खटीमा-सितारगंज क्षेत्र में श्रद्धा जागरण के माध्यम से जो ज्योति प्रज्वलित की गई है वह सम्पूर्ण क्षेत्र को प्रकाशवान करते हुए - हदय में अपनी संस्कृति, मान्यता, धर्म व संस्कारों के बीज प्रस्फुटित कर रही है जो आगे चलकर निश्चित ही थारू समाज के लिए नव जागरण काल के समानान्तर होगा।

( उपर्युक्त कथन मद्धा-जागरण के कार्यों से प्रभावित अनुभव आधारित है. जिनका संबंध किसी धर्म, संस्था या संस्कृति से प्रभावित नहीं है। यह लेख वर्ष 2021में लिखा गया था जिसे अब पब्लिश किया गया है।,)
श्रद्धा जागरण के सभी सेवादारों को समर्पित और श्रीमान स्वर्गीय डिंल्लू सिंह राणा जी की स्मृति में 
नवीन सिंह राणा द्वारा संकलित 

- नवीन सिह

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